शनिवार, 18 जून 2016

सब कुछ सूना-सूना

!!!---: सब कुछ सूना-सूना :---!!!
=============================

"अपुत्रस्य गृहं शून्यं दिशः शून्यास्त्वबान्धवाः ।
मूर्खस्य हृदयं शून्यं सर्वशून्या दरिद्रता ।।"
(चाणक्य-नीतिः--04.14)

अर्थः----पुत्रहीन मनुष्य का घर सूना होता है, बन्धुओं से हीन मनुष्य के लिए दसों दिशाएँ सूनी होती है, मूर्ख मनुष्य का हृदय सूना होता है और दरिद्र (गरीब) के लिए तो सब कुछ सूना होता है ।

विमर्शः---आचार्य चाणक्य एक अन्य स्थल पर कहा है कि दरिद्र को सब ओर से कष्ट-ही-कष्ट मिलता हैः-----
"सर्वकष्टा दरिद्रता ।"

निर्धनता सभी प्रकार के कष्ट देने वाली है ।

भर्तृहरि ने वैराग्यशतक में लिखा है कि दरिद्रता की अपेक्षा मर जाना ही ठीक हैः---
"दारिद्र्यान्मरणं वरम् ।"

और....

"दारिद्र्यमेकं गुणकोटिनाशी ।"

एक दरिद्रता सारे गुणों पर पानी फेर देता है ।

इतना सब कुछ होने पर भी दरिद्रता का एक लाभ हैः---

"हे दारिद्र्य ! नमस्तुभ्यं सिद्धोहं त्वत्प्रसादतः ।
पश्याम्हं जगत्सर्वं न मां पश्यति कश्चन ।।"

अर्थः---हे दरिद्रता ! तुझे नमस्कार हो । तेरी कृपा से मैंने सिद्धि प्राप्त कर ली है । क्या सिद्धि है ? मैं सारे संसार के लोगों को देख सकता हूँ, परन्तु दरिद्र होने के कारण मुझे कोई नहीं देखता , देख पाता ।
==============================

www.vaidiksanskrit.com

===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(2.) वैदिक साहित्य संस्कृत में
www.facebook.com/vedisanskrit
(3.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(4.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(5.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(8.) संस्कृत-हिन्दी में काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(9.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(10.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(11.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidik
(12.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(13.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(14.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(15.) अन्ताराष्ट्रिय कवि प्रवीण शुक्ल
www.facebook.com/kavipraveenshukla
(16.) वीर भोग्या वसुन्धरा
www.facebook.com/virbhogya
(17.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(15.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(16) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya

बुधवार, 1 जून 2016

दान की महिमा

!!!---: दान की महिमा :---!!!
=======================
क्षीयन्ते सर्वदानानि यज्ञहोमबलिक्रियाः ।
न क्षीयन्ते पात्रदानमभयं सर्वदेहिनाम् ।।
(चाणक्य-नीतिः--16.14)

अर्थः----अन्न, जल, वस्त्र, भूमिदान आदि सब प्रकार के दान तथा ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ और बलिवैश्वदेवयज्ञ आदि सभी कर्म नष्ट हो जाते हैं, परन्तु सुपात्र को दिया गया दान और प्राणिमात्र को दिया गया अभयदान कभी नष्ट नहीं होता ।

विमर्शः---सुपात्र कौन है

उत्तरः--जो ब्रह्मचारी, जितेन्द्रिय, वेदज्ञ, धर्मात्मा, सत्यवादी, उदार, परोपकारप्रिय, निन्दा-स्तुति में हर्ष-शोक-रहित , अभिमान-शून्य, गम्भीराशय, सदाचार-युक्त, दुष्टाचार-रहित, पराए सुख के लिए अपने प्राणों को भी समर्पित करने वाला, निर्भय, उत्साही आदि शुभ लक्षणयुक्त मनुष्य को सुपात्र कहते हैं । ऐसे मनुष्य को दिया हुआ दान अक्षय होता है ।

अभयदान की महिमा में कहा गया हैः---

अभयं सर्वभूतेभ्यो दत्त्वा यश्चरते मुनिः ।
न तस्य सर्वभूतेभ्यो भयमुत्पद्यते क्वचित् ।।
(म.भा.शान्तिपर्व 192.4)



अर्थः---जो मुनि सब प्राणियों को अभयदान देकर विचरता है, उसे समस्त प्राणियों में किसी से भी कहीं भय नहीं होता ।
==============================

www.vaidiksanskrit.com

===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(2.) वैदिक साहित्य संस्कृत में
www.facebook.com/vedisanskrit
(3.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(4.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(5.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(8.) संस्कृत-हिन्दी में काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(9.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(10.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(11.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidik
(12.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(13.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(14.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(15.) अन्ताराष्ट्रिय कवि प्रवीण शुक्ल
www.facebook.com/kavipraveenshukla
(16.) वीर भोग्या वसुन्धरा
www.facebook.com/virbhogya
(17.) आर्यावर्त्त-गौरवम्

हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(15.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(16) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya

गुरुवार, 26 मई 2016

दुर्जन सज्जन कभी नहीं बन सकता



!!!---: दुर्जन सज्जन कभी नहीं बन सकता :---!!!
=====================================

"न दुर्जनः साधुदशामुपैति बहुप्रकारैरपि शिक्ष्यमाणः ।
आमूलसिक्तः पयसा घृतेन न निम्बवृक्षो मधुरत्वमेति ।।"
(चाणक्य-नीतिः---11.06)

अर्थः---यह ध्रुव सत्य है कि अनेक प्रकार से समझाने और सिखाने पर भी दुष्ट मनुष्य सज्जन नहीं बन सकता, जैसे जड सहित दूध और घी से सींचे जाने पर भी नीम का वृक्षा मीठा नहीं होता ।

विमर्शः-----

किसी के स्वभाव को बदलना सम्भव नहींः---

"मधुना सिञ्चयेन्निम्बं निम्बः किं मधुरायते ।
जातिस्वभावदोषोSयं कटुकत्वं न मुञ्चति ।।"

अर्थः---नीम की जड को मधु से सींचने पर भी क्या नीम मीठा हो सकता है ? कदापि नहीं । कडवापन उसका जाति स्वभाव दोष है, अतः वह उसे नहीं छोड सकता ।

"यश्च निम्बं परशुना यश्चैनं मधुसर्पिषा ।
यश्चैनं गन्धमाल्याद्यैः सर्वस्य कटुरेव सः ।।"
अरुणदत्तः

अर्थः---जो कुल्हाडे से नीम को काटता है, जो मधु और घृत से उसे सींचता है और जो गन्धमाला आदि से उसकी पूजा करता है---उन सबके लिए वह कडवा ही होता है ।

"आम्रं छित्वा कुठारेण निम्बं परिचरेत्तु कः ।
यश्चैनं पयसा सिञ्चेन्नैवास्य मधुरो भवेत् ।।"
(वा.रा.अयो.का. 35.16)

अर्थः---कौन बुद्धिमान् आम को कुल्हाडे से काटकर उसके स्थान पर नीम की सेवा करेगा ? जो आम के स्थान पर नीम को दूध से सींचता है, उनके लिए भी वह नीम मीठा फल देने वाला नहीं हो सकता ।

'द्विधा भज्येयमप्येवं न नमेयं तु कस्यचित् ।
एष मे सहजो दोषः स्वभावो दुरतिक्रमः ।।"
(वा.रा.युद्ध.का. 36.11)

अर्थः---रावण माल्यवान् से कहता है---"मैं बीच में से दो टुकडे हो जाऊँगा, परन्तु किसी सामने झुकूँगा नहीं, यह मेरा स्वाभाविक दोष है और स्वभाव अपरिवर्तनशील होता है ।"

"स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा ।
सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम् ।।"
(पञ्चतन्त्र---1.280)

अर्थः---उपदेश से कोई किसी के स्वभाव को नहीं बदल सकता । भलीभाँति खौलाया हुआ भी पानी पुनः शीतल हो जाता है ।

इस आधार पर कहा जा सकता है कि भारतवर्ष में म्लेच्छ लगभग 1000 वर्षों से राज्य कर रहे थे, वे सभी दुष्ट स्वभाव के थे , इसीलिए उन्होंने भारत को गुलाम बनाया, वे कभी सुधर नहीं सकते । इनपर कभी विश्वास न करें ।


==============================

www.vaidiksanskrit.com

===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(2.) वैदिक साहित्य संस्कृत में
www.facebook.com/vedisanskrit
(3.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(4.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(5.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(8.) संस्कृत-हिन्दी में काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(9.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(10.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(11.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidik
(12.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(13.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(14.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(15.) अन्ताराष्ट्रिय कवि प्रवीण शुक्ल
www.facebook.com/kavipraveenshukla
(16.) वीर भोग्या वसुन्धरा
www.facebook.com/virbhogya
(17.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
 www.facebook.com/aryavartgaurav
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(15.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(16) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya